#themodernpoets

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Don't give up 
Don't give in 
Or maybe 
Just for once 
Give in with your all 
For even the sun needs to set 
In the depths of darkness 
To touch the moon 
With nothing but the folds 
Of his old yellow robe
Don't give up 
Just give in 
For death comes easy 
Not when you're drowning 
But when there's safety 
Stitched onto your skin
Don't give up
When poetry freezes in your veins 
Like a scream trapped in the throat 
Of an unwanted infant 
Give into the lunacy 
Into the pain and hurt 
Let autumn change to winter 
And warmth to change to fever
Don't give up 
Just give in 
Just so you know 
The mercury in your thermometer 
Seeks the same freedom 
That your poems blabber 
Don't give up 
Just give in
For everything that matters 
Lies on the ground
For everything that matters 
Ends up on the ground..
~ My epitaph .
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.#worldsuicidepreventionweek #writerscommunity #writersofinsta #writersofindia #writers #writersofig #writersofinstagram #poetryisart #poetryporn #poetsofinstagram #poetryofinstagram #poetryisnotdead #poetryislife #poetsofindia #poetrycommunity #instapoetry #aesthetic #aesthetictumblr #aestheticedit #mobilephotograph #themodernpoets #pedestalpoetry #packpoetry #voiceofpoets #silverleafpoetry #thepenwielders #thequillcompany #bleedingsoulpoetry #poetsofficial

Don't give up Don't give in Or maybe Just for once Give in with your all For even the sun needs to set In the depths of darkness To touch the moon With nothing but the folds Of his old yellow robe Don't give up Just give in For death comes easy Not when you're drowning But when there's safety Stitched onto your skin Don't give up When poetry freezes in your veins Like a scream trapped in the throat Of an unwanted infant Give into the lunacy Into the pain and hurt Let autumn change to winter And warmth to change to fever Don't give up Just give in Just so you know The mercury in your thermometer Seeks the same freedom That your poems blabber Don't give up Just give in For everything that matters Lies on the ground For everything that matters Ends up on the ground.. ~ My epitaph . . . . . . . .#worldsuicidepreventionweek #writerscommunity #writersofinsta #writersofindia #writers #writersofig #writersofinstagram #poetryisart #poetryporn #poetsofinstagram #poetryofinstagram #poetryisnotdead #poetryislife #poetsofindia #poetrycommunity #instapoetry #aesthetic #aesthetictumblr #aestheticedit #mobilephotograph #themodernpoets #pedestalpoetry #packpoetry #voiceofpoets #silverleafpoetry #thepenwielders #thequillcompany #bleedingsoulpoetry #poetsofficial - 7 hours ago

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माटी के शायर और जमीनी हकीक़त के सशक्त हस्ताक्षर प्रख्यात शायर अदम गोंडवी ने जिंदगी भर आम आदमी के दर्द को उकेरा। खांटी माटी के इस शायर की पहचान मुफलिसी के आईने से होती है। गोंडा के परसपुर के गांव आंटा में जन्मे इस शख्सियत की आज सोमवार को जयंती है। अदम गोंडवी रामनाथ सिंह हिंदी ग़ज़ल लेखन परम्परा के महान गज़लकारों में गिने जाते हैं। हिंदी ग़जल परम्परा में दुष्यंत कुमार के परम्परा का सार्थक निर्वाह करने वाले ग़जलकारों में अदम का नाम आता है। विसंगतियाँ,राजनीति की आदर्शहीनता,भ्रष्ट और अवसरवादी प्रवृत्तियो का चित्रण,मुखिया,सरपंच,नेता,विधायक,प्रशासक,आदि का दलाल में बदलना आदि का यथार्थ चित्रण अदम करते रहे।अदम की पैनी निगाहे चमारटोली से संसद भवन तक की गतिविधियों पर नज़र रखती थीं ।धुर ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर की चमक-दमक, शोषण,अन्याय,अत्याचार के खिल़ाफ बेबाकी से कलम चलाने वालो में अदम का नाम आता है।भूख,बेरोजगारी,मूल्यहीनता,घूस,आदि का यथार्थ चित्रण अदम अपने ग़जलों में करते थे। हिंदी के जनकवि के रूप में जो ख्याति नागार्जुन,त्रिलोचन आदि को मिली है, वहीं ख्याति हिंदी ग़जलकार के रुप में अदम जी  की भी है।अदम बहुत ही सहजता से अपनी बात रखते थे ।बोलचाल की भाषा में,जन भाषा में,वगैर लाग-लपेट के। जनता की बदहाली,नेताओं में पनपती दलाली,साहित्यकारों में पनपी कटुता,ईर्ष्या,ऊँच-नीच की भावना,किसी को उठाने ,किसी को गिराने की साजिश आदि पर अदम प्रहार करते थे। गुटबाजी,ईर्ष्या आदि जो साहित्य को दूषित-कलुषित कर रही हैं।अदम लिखते हैं- "इनके कुत्सित संबंधों से पाठक का क्या लेना देना, लेकिन ये तो जिद पे अड़े हैं भोग-विलास लिखेगें।"
सरकार की जनविरोधी नीतियाँ,राजनीति के दोहरीनीति के चलते युवा समाज में पनप रही हताशा को देख वे बहुत दुखी रहते। समाज में बदलाव के लिए उन्होंने लिखा - "घर के ठंडे चूल्हे पर खाली पतीली है। बताओं कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है। आजाद भारत के बदलते चित्र पर प्रहार करते हुए अदम ने लिखा -
'' सौ में से सत्तर आदमी फिलहाल जब नाशाद है, दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आजाद है।"
राजनीति पर प्रहार करते हुए अदम लिख गये - "वे सांप्रदायिक दंगों के पीछे की सियासत को बखूबी पहचानते थे। शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले।" देश की प्रशासन की तुलना करते हुए तंज कसते हुए अदम ने कहा - "जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्काम कर देगें। कमीशन दो तो हिन्दोस्तान को निलाम कर देगें। सदन में घूस देकर बच गयी कुर्सी तो देखोगें। वे अगली योजना में घूसखोरी आम कर देगें।

माटी के शायर और जमीनी हकीक़त के सशक्त हस्ताक्षर प्रख्यात शायर अदम गोंडवी ने जिंदगी भर आम आदमी के दर्द को उकेरा। खांटी माटी के इस शायर की पहचान मुफलिसी के आईने से होती है। गोंडा के परसपुर के गांव आंटा में जन्मे इस शख्सियत की आज सोमवार को जयंती है। अदम गोंडवी रामनाथ सिंह हिंदी ग़ज़ल लेखन परम्परा के महान गज़लकारों में गिने जाते हैं। हिंदी ग़जल परम्परा में दुष्यंत कुमार के परम्परा का सार्थक निर्वाह करने वाले ग़जलकारों में अदम का नाम आता है। विसंगतियाँ,राजनीति की आदर्शहीनता,भ्रष्ट और अवसरवादी प्रवृत्तियो का चित्रण,मुखिया,सरपंच,नेता,विधायक,प्रशासक,आदि का दलाल में बदलना आदि का यथार्थ चित्रण अदम करते रहे।अदम की पैनी निगाहे चमारटोली से संसद भवन तक की गतिविधियों पर नज़र रखती थीं ।धुर ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर की चमक-दमक, शोषण,अन्याय,अत्याचार के खिल़ाफ बेबाकी से कलम चलाने वालो में अदम का नाम आता है।भूख,बेरोजगारी,मूल्यहीनता,घूस,आदि का यथार्थ चित्रण अदम अपने ग़जलों में करते थे। हिंदी के जनकवि के रूप में जो ख्याति नागार्जुन,त्रिलोचन आदि को मिली है, वहीं ख्याति हिंदी ग़जलकार के रुप में अदम जी की भी है।अदम बहुत ही सहजता से अपनी बात रखते थे ।बोलचाल की भाषा में,जन भाषा में,वगैर लाग-लपेट के। जनता की बदहाली,नेताओं में पनपती दलाली,साहित्यकारों में पनपी कटुता,ईर्ष्या,ऊँच-नीच की भावना,किसी को उठाने ,किसी को गिराने की साजिश आदि पर अदम प्रहार करते थे। गुटबाजी,ईर्ष्या आदि जो साहित्य को दूषित-कलुषित कर रही हैं।अदम लिखते हैं- "इनके कुत्सित संबंधों से पाठक का क्या लेना देना, लेकिन ये तो जिद पे अड़े हैं भोग-विलास लिखेगें।" सरकार की जनविरोधी नीतियाँ,राजनीति के दोहरीनीति के चलते युवा समाज में पनप रही हताशा को देख वे बहुत दुखी रहते। समाज में बदलाव के लिए उन्होंने लिखा - "घर के ठंडे चूल्हे पर खाली पतीली है। बताओं कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है। आजाद भारत के बदलते चित्र पर प्रहार करते हुए अदम ने लिखा - '' सौ में से सत्तर आदमी फिलहाल जब नाशाद है, दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आजाद है।" राजनीति पर प्रहार करते हुए अदम लिख गये - "वे सांप्रदायिक दंगों के पीछे की सियासत को बखूबी पहचानते थे। शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले।" देश की प्रशासन की तुलना करते हुए तंज कसते हुए अदम ने कहा - "जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्काम कर देगें। कमीशन दो तो हिन्दोस्तान को निलाम कर देगें। सदन में घूस देकर बच गयी कुर्सी तो देखोगें। वे अगली योजना में घूसखोरी आम कर देगें। - 12 hours ago

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उन्यासी से लेकर उन्नीस तक, साढ़े नौ हजार से ज़्यादा मौत 
हजारों घर, हज़ारों परिवार, हज़ारों मील में पसरा शोक 
हर तरफ़  कोलाहल  जल का, जारी है प्रकृति का प्रकोप 
सो रहा १३० करोड़ का देश,  पूरा राज्य बन चुका भवन कोप

खूब बहस हो रही टीवी पर, 
खूब  पड़ रहे पोस्ट सोशल मीडिया पर 
करोड़ों हो रहे खर्च इस मुद्दे पर, 
खूब ख़ुद का प्रचा
र बस लग नहीं पा रही रोक इस विपदा पर 
एक किसान है अनाज की पोटलियां लिए 
कुपोषित , जर्जर शरीर, पेट पीठ छूने को है 
सवाल होता है कि बाढ़ में डूब कर कैसा लग रहा है ? 
वो रो कर कहता है कि, इस बाढ़ से सब  बर्बाद हो रहा है 
मेरा 7 साल का बच्चा 10 दिन से नहीं मिल रहा है 
खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा है 
घर,गाँव,खेत सब बर्बाद हो रहा है 
फिर आती है आवाज़ वीडियो बनाने वाले की 
कि ये थे हालात बिहार में आई खौफनाक बाढ़ के
इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें लाइक करें और इन सब के दौरान वो किसान खो चुका होता है 
अपना बच्चा 
अपना घर 
अपना खेत
 अपना गांव
 अपना शरीर 
और बस रह जाती है 
उसकी लाश बहती रहती है पानी में और इधर वीडियो बह रहा होता है 
और सोशल मीडिया में खूब लाइक्स शेयर बटोरते हुए 
चलातें है सारे न्यूज़ चैनल 
मिलती हैं सुर्खियां नहीं मिल पाता है तो बस 
जीवन उस किसान को 
नहीं मिल पाता है 
उसको अपना बच्चा 
अपना गाँव और अपना घर 
कुछ दिन बाद मिलती है उसकी लाश और बनता है एक और वीडियो 
ये उन्यासी से लेकर उन्नीस तक ऐसे ही चल रहा है 
इस मुद्दे पर जीतें जातें है न जाने कितने चुनाव 
इकट्ठे होतें हैं ढेर सारे फंड 
बस नही इकट्टा हो पाता है बस इस विपदा से लड़ने का तरीका
 इससे लड़ने का ढंग 
और ना ही हो पाता है कोई भी दुरुस्त बंदोबस्त

बाढ़ के बाद बचतीं है
ढेर सारी लाशें, टूटे मकान, 
खोई उम्मीदें, मदद मांगती आँखें, निराश शरीर, 
अपना आशियाँ ढूंढते हुए 
फिर भरता है हौसला वहां का हर एक इंसान 
फिर बनाता है मकान और तैयार हो जाता है दुबारा बहने को 
दुबारा डूब जाता है, घर, शहर, जानवर,इंसान
इंसान डूबते हुए देख रहा होता है दूसरे इंसान को
और हटा लेता है आँखें, रो पड़ता है फिर भूल जाता है
 वहाँ इंसान बाढ़ में और यहाँ शर्म में डूबता है

साथ मे डूब रही होती है घर की छतें डूब रहा होता है पुल, गाड़ियां, स्कूल 
डूब रहें होतें हैं बस्ते,गेंद बैट, साइकिलें डूब रही होती हैं शरीर की यादें डूब रहा होता है सब कुछ 
एक इंसान गले तक डूबा, तड़प रहा होता है
लगा रहा होता है गुहारें, सोच रहा होता है
कोई बचाने वाला हाथ आता ही होगा
जो बचाएगा डूबने से इस देश को,इंसानियत को ©Mohit Dwivedi

उन्यासी से लेकर उन्नीस तक, साढ़े नौ हजार से ज़्यादा मौत हजारों घर, हज़ारों परिवार, हज़ारों मील में पसरा शोक हर तरफ़ कोलाहल जल का, जारी है प्रकृति का प्रकोप सो रहा १३० करोड़ का देश, पूरा राज्य बन चुका भवन कोप खूब बहस हो रही टीवी पर, खूब पड़ रहे पोस्ट सोशल मीडिया पर करोड़ों हो रहे खर्च इस मुद्दे पर, खूब ख़ुद का प्रचा र बस लग नहीं पा रही रोक इस विपदा पर एक किसान है अनाज की पोटलियां लिए कुपोषित , जर्जर शरीर, पेट पीठ छूने को है सवाल होता है कि बाढ़ में डूब कर कैसा लग रहा है ? वो रो कर कहता है कि, इस बाढ़ से सब बर्बाद हो रहा है मेरा 7 साल का बच्चा 10 दिन से नहीं मिल रहा है खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा है घर,गाँव,खेत सब बर्बाद हो रहा है फिर आती है आवाज़ वीडियो बनाने वाले की कि ये थे हालात बिहार में आई खौफनाक बाढ़ के इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें लाइक करें और इन सब के दौरान वो किसान खो चुका होता है अपना बच्चा अपना घर अपना खेत अपना गांव अपना शरीर और बस रह जाती है उसकी लाश बहती रहती है पानी में और इधर वीडियो बह रहा होता है और सोशल मीडिया में खूब लाइक्स शेयर बटोरते हुए चलातें है सारे न्यूज़ चैनल मिलती हैं सुर्खियां नहीं मिल पाता है तो बस जीवन उस किसान को नहीं मिल पाता है उसको अपना बच्चा अपना गाँव और अपना घर कुछ दिन बाद मिलती है उसकी लाश और बनता है एक और वीडियो ये उन्यासी से लेकर उन्नीस तक ऐसे ही चल रहा है इस मुद्दे पर जीतें जातें है न जाने कितने चुनाव इकट्ठे होतें हैं ढेर सारे फंड बस नही इकट्टा हो पाता है बस इस विपदा से लड़ने का तरीका इससे लड़ने का ढंग और ना ही हो पाता है कोई भी दुरुस्त बंदोबस्त बाढ़ के बाद बचतीं है ढेर सारी लाशें, टूटे मकान, खोई उम्मीदें, मदद मांगती आँखें, निराश शरीर, अपना आशियाँ ढूंढते हुए फिर भरता है हौसला वहां का हर एक इंसान फिर बनाता है मकान और तैयार हो जाता है दुबारा बहने को दुबारा डूब जाता है, घर, शहर, जानवर,इंसान इंसान डूबते हुए देख रहा होता है दूसरे इंसान को और हटा लेता है आँखें, रो पड़ता है फिर भूल जाता है वहाँ इंसान बाढ़ में और यहाँ शर्म में डूबता है साथ मे डूब रही होती है घर की छतें डूब रहा होता है पुल, गाड़ियां, स्कूल डूब रहें होतें हैं बस्ते,गेंद बैट, साइकिलें डूब रही होती हैं शरीर की यादें डूब रहा होता है सब कुछ एक इंसान गले तक डूबा, तड़प रहा होता है लगा रहा होता है गुहारें, सोच रहा होता है कोई बचाने वाला हाथ आता ही होगा जो बचाएगा डूबने से इस देश को,इंसानियत को ©Mohit Dwivedi - 2 days ago

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#ShairaKaSalaam #shayari #shabd #shair #poetry #hindipoetry #kavi #lekhak #writersofindia #writersofcanada #toronto #writing #urdupoetry #Urdu shayari #hindi #hindikavita #hindi #writersofinstagram #themodernpoets #poetrycommunity

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वो तुम ही तो थे ना जिसने कहा था कि हर बार सब कुछ बेहतर होकर ही ख़ूबसूरत नहीं होता... हर बार ये ज़रूरी नहीं कि , आपने वो हर बारीकी जो सोच रखी है वो तस्वीर वैसी ही हो, या फिर हर एक पत्थर जिसका सफ़र बयान होता हो वो ही ख़ास हो....
शायद वो बातें सच मान लीं थीं मैंने, और ये सोच लिया था की सच ही तो कहते हो तुम... छोड़ने लग गई थी मैं भी बिना सँवारे आइने को आज कल, कुछ ख़ामियाँ जिनको मैं शायद जीने से बेहतर छिपाना समझती थी उन्हें यूँ ही जाने दिया था और हाँ वो जो मेरे कुछ पुराने से नग़मे थे ना जिनको मैंने सिर्फ़ डायरी में ही रहने दिया था , आज कल उन्हें गुनगुना कर ताज़ा कर लिया करती हूँ... बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम कहा करते थे , शायद ...
या फ़िर मैंने समझा ही नहीं... क्यूँकि मैं तो नासमझ हूँ ना , कभी समझ ही कहाँ पायी कि तुम बस कहते थे... और कहने और होने में फ़र्क़ होता है...
©️
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#realizations #stories #thoughts #writeups #photography #photographyiphone #gallery  #yaadein #hindinama #themodernpoets #yourquote #thesocialhouse

वो तुम ही तो थे ना जिसने कहा था कि हर बार सब कुछ बेहतर होकर ही ख़ूबसूरत नहीं होता... हर बार ये ज़रूरी नहीं कि , आपने वो हर बारीकी जो सोच रखी है वो तस्वीर वैसी ही हो, या फिर हर एक पत्थर जिसका सफ़र बयान होता हो वो ही ख़ास हो.... शायद वो बातें सच मान लीं थीं मैंने, और ये सोच लिया था की सच ही तो कहते हो तुम... छोड़ने लग गई थी मैं भी बिना सँवारे आइने को आज कल, कुछ ख़ामियाँ जिनको मैं शायद जीने से बेहतर छिपाना समझती थी उन्हें यूँ ही जाने दिया था और हाँ वो जो मेरे कुछ पुराने से नग़मे थे ना जिनको मैंने सिर्फ़ डायरी में ही रहने दिया था , आज कल उन्हें गुनगुना कर ताज़ा कर लिया करती हूँ... बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम कहा करते थे , शायद ... या फ़िर मैंने समझा ही नहीं... क्यूँकि मैं तो नासमझ हूँ ना , कभी समझ ही कहाँ पायी कि तुम बस कहते थे... और कहने और होने में फ़र्क़ होता है... ©️ . . . #realizations #stories #thoughts #writeups #photography #photographyiphone #gallery #yaadein #hindinama #themodernpoets #yourquote #thesocialhouse - 3 days ago

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मजाज़ लखनवी 💞
#शायरी #शेर #shayar #shayarimood #shayaricollection #peace #poetryoftheday #poetry_addicts #themodernpoets #themodernpoet #tmpfamily

मजाज़ लखनवी 💞 #श ायरी #श ेर #shayar #shayarimood #shayaricollection #peace #poetryoftheday #poetry_addicts #themodernpoets #themodernpoet #tmpfamily - 3 days ago

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मजाज़ साहब की यौम ए पैदाइश मुबारक़ 💞💞
#mohit #mohitdwivedi #tmp #tmpian 
#themodernpoets #shayari #sher #poetrymaykhana

मजाज़ साहब की यौम ए पैदाइश मुबारक़ 💞💞 #mohit #mohitdwivedi #tmp #tmpian #themodernpoets #shayari #sher #poetrymaykhana - 3 days ago

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#poetryhindi #Nojoto #themodernpoets #yourqoute  #thetapeandtale

#poetryhindi #Nojoto #themodernpoets #yourqoute #thetapeandtale - 4 days ago

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तुम परिंदों से ज़ियादा तो नहीं हो आज़ाद 
शाम होने को है अब घर की तरफ़ लौट चलो ©इरफ़ान सिद्दीकी
#sher #shayari #themodernpoets #tmp #ghazal #nazm #urdupoetry #rekhtq #shayari #shayaricollection

तुम परिंदों से ज़ियादा तो नहीं हो आज़ाद शाम होने को है अब घर की तरफ़ लौट चलो ©इरफ़ान सिद्दीकी #sher #shayari #themodernpoets #tmp #ghazal #nazm #urdupoetry #rekhtq #shayari #shayaricollection - 4 days ago

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Happy Birthday @eminem 💞
#eminem #eminembirthday #marshalmatthers #peace #rapgod #indianeminem #m #tmpianmohit #mohit #themodernpoets

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#charlesbokowski #communityofpoets #poetsofinstagram #globalpoetcult #writingpoem #deadpoetssociety #yannisritsos #warrenwilsonmfa #literature #fountainpen #franklinchristoph #cursivewriting #instapoet #modernpoetry #lovetoread #journaling #creativewriting #work #poetryischurch #surviving #poetry #poets #longlivepoetry #iowawritersworkshop #poetryischurch #thewritinglife #creativewriting #themodernpoets

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Waise to ya Nazam meri Pasandida Nazmo mai se ek hai, magar aab ya mera liya bahut azeez ho gaye hai वजह ye hai ke, is nazam ki rawangi aur mohit ke kahen ka tareeka behad Khoobsurat surat hai!!
#Mai_Tenu_phir_milange
#nazam
#amrita_pritam_ki_kalam_se
#themodernpoets
#tmpian

Waise to ya Nazam meri Pasandida Nazmo mai se ek hai, magar aab ya mera liya bahut azeez ho gaye hai वजह ye hai ke, is nazam ki rawangi aur mohit ke kahen ka tareeka behad Khoobsurat surat hai!! #Mai_Tenu_phir_milange #nazam #amrita_pritam_ki_kalam_se #themodernpoets #tmpian - 6 days ago

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हिज्र की पहली शाम के साये दूर उफ़क़ तक छाये थे
हम जब उसके शहर से निकले सब रास्ते सँवलाये थे

जाने वो क्या सोच रहा था अपने दिल में सारी रात
प्यार की बातें करते करते उस के नैन भर आये थे

मेरे अन्दर चली थी आँधी ठीक उसी दिन पतझड़ की
जिस दिन अपने जूड़े में उसने कुछ फूल सजाये थे

उसने कितने प्यार से अपना कुफ़्र दिया नज़राने में
हम अपने ईमान का सौदा जिससे करने आये थे

कैसे जाती मेरे बदन से बीते लम्हों की ख़ुश्बू
ख़्वाबों की उस बस्ती में कुछ फूल मेरे हम-साये थे

कैसा प्यारा मंज़र था जब देख के अपने साथी को
पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने अपने पर फैलाये थे

रुख़्सत के दिन भीगी आँखों उसका वो कहना हाए "क़तील"
तुम को लौट ही जाना था तो इस नगरी क्यूँ आये थे

#themodernpoets #tmp #tmpian #poetry #ghazal #shayari #sher #qatil #poetryoftheday #peace

हिज्र की पहली शाम के साये दूर उफ़क़ तक छाये थे हम जब उसके शहर से निकले सब रास्ते सँवलाये थे जाने वो क्या सोच रहा था अपने दिल में सारी रात प्यार की बातें करते करते उस के नैन भर आये थे मेरे अन्दर चली थी आँधी ठीक उसी दिन पतझड़ की जिस दिन अपने जूड़े में उसने कुछ फूल सजाये थे उसने कितने प्यार से अपना कुफ़्र दिया नज़राने में हम अपने ईमान का सौदा जिससे करने आये थे कैसे जाती मेरे बदन से बीते लम्हों की ख़ुश्बू ख़्वाबों की उस बस्ती में कुछ फूल मेरे हम-साये थे कैसा प्यारा मंज़र था जब देख के अपने साथी को पेड़ पे बैठी इक चिड़िया ने अपने पर फैलाये थे रुख़्सत के दिन भीगी आँखों उसका वो कहना हाए "क़तील" तुम को लौट ही जाना था तो इस नगरी क्यूँ आये थे #themodernpoets #tmp #tmpian #poetry #ghazal #shayari #sher #qatil #poetryoftheday #peace - 7 days ago

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#ShairaKaSalaam #shayari #shabd #shair #poetry #hindipoetry #kavi #lekhak #writersofindia #writersofcanada #toronto #writing #urdupoetry #Urdu shayari #hindi #hindikavita #hindi #writersofinstagram #themodernpoets #poetrycommunity #likes

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#abdulkalam #missileman #birthday #themodernpoets #tmp #peace

#abdulkalam #missileman #birthday #themodernpoets #tmp #peace - 7 days ago

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Counter me wrong.
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Counter me wrong. #ShairaKaSalaam #shayari #shabd #shair #poetry #hindipoetry #kavi #lekhak #writersofindia #writersofcanada #toronto #writing #urdupoetry #Urdu shayari #hindi #hindikavita #hindi #writersofinstagram #themodernpoets #poetrycommunity - 8 days ago

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